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Subhash Chandra Bose ka jivan parichay (नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय)

नेताजीआजाद हिंद फौजअपडेट: 16 Oct 2026

Subhash chandra bose ka jivan parichay साहस और त्याग की ऐसी कथा है जिसमें एक युवक अंग्रेजी शासन की सबसे ऊँची नौकरी ठुकराता है, जेल और नजरबंदी झेलता है, वेश बदलकर देश से निकलता है और विदेश में भारत की स्वतंत्रता के लिए सेना खड़ी करता है। netaji subhash chandra bose ka jivan parichay, subhash chandra bose ka jeevan parichay और subhash chandra bose biography in hindi खोजने वाले विद्यार्थी यहाँ पूरी जानकारी क्रम से पढ़ सकते हैं।

नेताजी की जीवनी लिखते समय तीन चरण याद रखें: बंगाल और कांग्रेस की राजनीति, 1941 का गुप्त प्रस्थान, और आजाद हिंद फौज। अंत में दिया गया छोटा उत्तर बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार है। उस समय के दूसरे क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी विभाग में मिलेंगे।

सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय

मुख्य बातें

  • उपनाम

    नेताजी
  • जन्म

    23 जनवरी 1897, कटक (ओडिशा)
  • माता-पिता

    प्रभावती देवी और जानकीनाथ बोस
  • शिक्षा

    बी.ए. दर्शनशास्त्र (स्कॉटिश चर्च कॉलेज, 1918), कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
  • राजनीतिक गुरु

    देशबंधु चित्तरंजन दास
  • प्रमुख कार्य / योगदान

    कांग्रेस अध्यक्ष (1938, 1939), फॉरवर्ड ब्लॉक, आजाद हिंद फौज का नेतृत्व, आजाद हिंद सरकार (1943)
  • नारे

    जय हिंद, दिल्ली चलो, तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा
  • रचनाएँ

    द इंडियन स्ट्रगल, एन इंडियन पिलग्रिम (अधूरी आत्मकथा)
  • मृत्यु

    18 अगस्त 1945, ताइहोकू (ताइवान) में विमान दुर्घटना मानी जाती है, इस पर मतभेद रहे हैं

Subhash chandra bose ka jivan parichay: कटक में जन्म और विद्यार्थी जीवन

सुभाष का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ। पिता जानकीनाथ बोस वहाँ के प्रसिद्ध वकील थे और माता प्रभावती देवी धार्मिक स्वभाव की थीं। चौदह भाई बहनों में सुभाष नौवें थे। प्रारंभिक शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल और रेवेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल में हुई। किशोर अवस्था में स्वामी विवेकानंद के विचारों ने उन्हें बहुत प्रभावित किया, और वे उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे।

1913 में वे कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज पहुँचे, पर 1916 में एक अंग्रेज प्रोफेसर ओटन से जुड़े विवाद के बाद उन्हें निकाल दिया गया। फिर स्कॉटिश चर्च कॉलेज से 1918 में दर्शनशास्त्र में प्रथम श्रेणी के साथ बी.ए. किया। स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय पढ़ने वाले छात्र इन दोनों के वैचारिक संबंध को उत्तर में जोड़ सकते हैं।

आई.सी.एस. छोड़कर देश सेवा का संकल्प

परिवार की इच्छा पर वे 1919 में इंग्लैंड गए और कैम्ब्रिज में पढ़ते हुए अगस्त 1920 में भारतीय सिविल सेवा (आई.सी.एस.) की परीक्षा दी, जिसमें उनका चौथा स्थान आया। पर अंग्रेज सरकार की नौकरी करना उन्हें स्वीकार नहीं था। 22 अप्रैल 1921 को उन्होंने भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू को पत्र लिखकर सेवा से अलग होने का निर्णय बताया और भारत लौट आए।

कलकत्ता में वे देशबंधु चित्तरंजन दास के साथ काम करने लगे। 1924 में दास कलकत्ता के मेयर बने तो सुभाष नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए गए। 1925 में क्रांतिकारियों से संबंध के संदेह में उन्हें बर्मा की मांडले जेल भेजा गया, जहाँ उन्हें तपेदिक हो गया। 22 अगस्त 1930 को वे स्वयं कलकत्ता के मेयर चुने गए।

कांग्रेस अध्यक्ष से फॉरवर्ड ब्लॉक तक

1938 में हरिपुरा अधिवेशन में सुभाष कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने राष्ट्रीय योजना समिति बनाने की पहल की और पूर्ण स्वराज के लिए तेज संघर्ष की बात कही। 1939 में त्रिपुरी अधिवेशन से पहले हुए चुनाव में उन्होंने पट्टाभि सीतारमैया को हराया, जिन्हें गांधी जी का समर्थन था। कार्यसमिति के साथ मतभेद के कारण अप्रैल 1939 में उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया।

22 जून 1939 को उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। गांधी जी से तरीकों पर मतभेद होने के बावजूद दोनों के बीच परस्पर आदर बना रहा। इसके बाद अध्यक्ष पद डॉ राजेंद्र प्रसाद ने संभाला।

1941 का गुप्त प्रस्थान: कलकत्ता से बर्लिन

द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने पर सुभाष को गिरफ्तार किया गया और फिर कलकत्ता के एल्गिन रोड वाले घर में नजरबंद कर दिया गया। जनवरी 1941 की एक रात वे पठान का वेश बनाकर घर से निकल गए। पेशावर और काबुल होते हुए, इतालवी पासपोर्ट पर काउंट ऑरलैंडो मैजोटा नाम से यात्रा करके वे अप्रैल 1941 में जर्मनी पहुँचे।

  • बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर की स्थापना
  • युद्धबंदी भारतीय सैनिकों से इंडियन लीजन का गठन
  • आजाद हिंद रेडियो से देशवासियों को संबोधन

फरवरी 1943 में वे जर्मन पनडुब्बी से निकले और मेडागास्कर के पास जापानी पनडुब्बी में सवार होकर पूर्वी एशिया पहुँचे।

आजाद हिंद फौज और अस्थायी सरकार

4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में रासबिहारी बोस ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व सुभाष को सौंपा। सुभाष ने आजाद हिंद फौज (इंडियन नेशनल आर्मी) को नए सिरे से संगठित किया और महिलाओं के लिए रानी झाँसी रेजिमेंट बनाई, जिसका नाम रानी लक्ष्मीबाई की स्मृति में रखा गया।

आजाद हिंद के प्रमुख पड़ाव
तिथिघटना
21 अक्टूबर 1943सिंगापुर में आजाद हिंद की अस्थायी सरकार की घोषणा
30 दिसंबर 1943अंडमान में पहली बार भारतीय भूमि पर तिरंगा फहराया
1944इंफाल और कोहिमा की ओर अभियान, मणिपुर के मोइरांग में झंडा फहराया गया
4 जुलाई 1944बर्मा में तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा वाला भाषण
6 जुलाई 1944रेडियो भाषण में गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया

इंफाल कोहिमा अभियान सफल नहीं हुआ और रंगून के पतन के बाद आजाद हिंद सरकार का प्रभाव समाप्त हो गया। फिर भी नवंबर 1945 में लाल किले में फौज के अधिकारियों पर चले मुकदमों ने पूरे देश में अंग्रेज विरोधी भावना जगा दी।

नेताजी का लेखन

रचनाविधाविशेषता
द इंडियन स्ट्रगलइतिहास / राजनीतिक विश्लेषण1920 से 1934 तक के स्वतंत्रता संघर्ष का वर्णन, 1935 में लंदन से छपी और भारत में प्रतिबंधित हुई
एन इंडियन पिलग्रिमआत्मकथा (अधूरी)बचपन, विद्यार्थी जीवन और आई.सी.एस. छोड़ने तक की कथा
पत्र और भाषणसंकलनआजाद हिंद रेडियो और सभाओं में दिए संबोधन

वे बांग्ला और अंग्रेजी में लिखते थे। उनकी भाषा जोशीली और सीधी थी, जो युवाओं को कर्म के लिए पुकारती थी।

मृत्यु पर मतभेद और विरासत

प्रचलित मत के अनुसार 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू (अब ताइपे, ताइवान) में विमान दुर्घटना के बाद जलने से उनकी मृत्यु हुई। इस घटना की जाँच के लिए भारत सरकार ने अलग अलग समय पर समितियाँ और आयोग बनाए, जिनके निष्कर्ष एक जैसे नहीं रहे। इसलिए परीक्षा में यही लिखें कि उनकी मृत्यु विमान दुर्घटना में मानी जाती है, पर इस विषय पर मतभेद है।

जय हिंद का अभिवादन उन्हीं के कारण लोकप्रिय हुआ। हर वर्ष 23 जनवरी को देश पराक्रम दिवस मनाता है, जो उनका जन्मदिन है। 1937 में उन्होंने एमिली शेंकल से विवाह किया था।

टाइम लाइन: सुभाष चंद्र बोस के जीवन की घटनाएँ

वर्षघटना
1897कटक में जन्म
1918बी.ए., स्कॉटिश चर्च कॉलेज
1920आई.सी.एस. परीक्षा में चौथा स्थान
1921सेवा से त्यागपत्र, चित्तरंजन दास के साथ काम
1925मांडले जेल
1930कलकत्ता के मेयर
1938हरिपुरा में कांग्रेस अध्यक्ष
1939त्रिपुरी, त्यागपत्र, फॉरवर्ड ब्लॉक
1941नजरबंदी से निकलकर जर्मनी
1943आजाद हिंद फौज का नेतृत्व, अस्थायी सरकार
194518 अगस्त, ताइहोकू विमान दुर्घटना

नेताजी पर छोटा परीक्षा उत्तर

नेताजी सुभाष चंद्र बोस (1897 से 1945)

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, ओडिशा में हुआ। पिता जानकीनाथ बोस और माता प्रभावती देवी थीं। 1920 में उन्होंने आई.सी.एस. परीक्षा पास की, पर 1921 में देश सेवा के लिए उसे छोड़ दिया। चित्तरंजन दास उनके राजनीतिक गुरु थे। वे 1938 और 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष बने और 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया। 1941 में नजरबंदी से निकलकर वे जर्मनी और फिर पूर्वी एशिया पहुँचे। 1943 में उन्होंने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व संभाला और 21 अक्टूबर 1943 को अस्थायी सरकार की घोषणा की। जय हिंद और दिल्ली चलो उनके प्रसिद्ध नारे हैं। उनकी मृत्यु 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में मानी जाती है।

उत्तर का यह ढाँचा जीवन परिचय कैसे लिखें पेज पर विस्तार से समझाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुभाष चंद्र बोस की जीवनी के अनुसार उन्हें नेताजी किसने कहा?

जर्मनी में इंडियन लीजन के सैनिकों और भारतीयों ने उन्हें नेताजी कहकर संबोधित करना शुरू किया। बाद में आजाद हिंद फौज के समय यह नाम पूरे देश में प्रचलित हो गया।

subhash chandra bose ki jivani में आजाद हिंद सरकार की तिथि क्या है?

आजाद हिंद की अस्थायी सरकार की घोषणा 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में हुई। नेताजी इसके प्रमुख थे।

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा नारा कब दिया गया?

यह आह्वान 4 जुलाई 1944 को बर्मा में भारतीयों की एक सभा में दिया गया। इसका उद्देश्य आजाद हिंद फौज के लिए सैनिक और सहयोग जुटाना था।

नेताजी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद क्यों छोड़ा?

1939 में दोबारा अध्यक्ष चुने जाने के बाद कार्यसमिति के गठन को लेकर उनका गांधी जी के समर्थकों से मतभेद हुआ। काम न कर पाने की स्थिति में उन्होंने अप्रैल 1939 में पद छोड़ दिया।

पराक्रम दिवस कब मनाया जाता है?

नेताजी के जन्मदिन 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाया जाता है। भारत सरकार ने 2021 से इसे इस नाम से मनाना शुरू किया।

subhash chandra bose jivan parichay में मृत्यु के बारे में क्या लिखें?

लिखें कि उनकी मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू में विमान दुर्घटना में मानी जाती है, पर इस पर विद्वानों और जाँच आयोगों में मतभेद रहा है। निश्चित तथ्य की तरह कोई दूसरा दावा न लिखें।