Mahatma Gandhi ka jivan parichay खोजने वाले विद्यार्थी अक्सर इसे gandhi ji ka jivan parichay, mahatma gandhi biography in hindi या mahatma gandhi ka jivani और gandhi ji ki jivani नाम से भी ढूँढते हैं, और यह पेज बोर्ड परीक्षा की तैयारी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। मोहनदास करमचंद गांधी ने सत्य और अहिंसा को राजनीति का हथियार बनाया और करोड़ों साधारण लोगों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ दिया। इसी कारण देश उन्हें राष्ट्रपिता और प्यार से बापू कहता है।
यहाँ महात्मा गांधी का जीवन परिचय हिंदी में क्रम से दिया गया है: बचपन, लंदन में पढ़ाई, दक्षिण अफ्रीका के प्रयोग, भारत के बड़े आंदोलन, उनकी पुस्तकें और अंत में परीक्षा में लिखने लायक छोटा उत्तर। पूरा पेज प्रिंट निकालकर बार बार पढ़ने लायक है। अन्य सेनानियों के लिए स्वतंत्रता सेनानी वाला पेज देखें।

मुख्य बातें
पूरा नाम
मोहनदास करमचंद गांधीजन्म
2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर (काठियावाड़, गुजरात)माता-पिता
पुतलीबाई और करमचंद गांधीपत्नी
कस्तूरबा गांधी (विवाह 1883)शिक्षा
बैरिस्टर, इनर टेम्पल, लंदन (1891)उपाधियाँ
महात्मा, बापू, राष्ट्रपिताप्रमुख कार्य / योगदान
सत्याग्रह का विचार, चंपारण, असहयोग, दांडी यात्रा, भारत छोड़ो आंदोलनरचनाएँ
हिंद स्वराज, सत्य के प्रयोग (आत्मकथा)मृत्यु
30 जनवरी 1948, बिड़ला भवन, नई दिल्ली
Mahatma Gandhi ka jivan parichay: बचपन, विवाह और पढ़ाई
गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ। पिता करमचंद गांधी रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई बहुत धार्मिक, व्रत उपवास करने वाली स्त्री थीं। माँ की सादगी और नियम पालन का गहरा असर बालक मोहनदास पर पड़ा। स्कूल में वे औसत विद्यार्थी थे, संकोची थे, पर सच बोलने का आग्रह उनमें बचपन से था।
सन् 1883 में, जब मोहनदास लगभग तेरह साल के थे, कस्तूरबा से उनका विवाह हुआ। 4 सितंबर 1888 को वे कानून पढ़ने इंग्लैंड गए। वहाँ शाकाहार पर टिके रहे, गीता और बाइबिल पढ़ी, और जून 1891 में बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। मुंबई और राजकोट में वकालत जमी नहीं, क्योंकि अदालत में बोलते समय वे घबरा जाते थे।
दक्षिण अफ्रीका: जहाँ सत्याग्रह का जन्म हुआ
सन् 1893 में एक व्यापारी फर्म के मुकदमे के लिए वे दक्षिण अफ्रीका गए। जून 1893 में पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर प्रथम श्रेणी का टिकट होते हुए भी उन्हें रंगभेद के कारण डिब्बे से उतार दिया गया। उस ठंडी रात के अपमान ने उन्हें अन्याय के विरुद्ध खड़ा होने का निश्चय दिया।
- 22 अगस्त 1894 को नेटाल इंडियन कांग्रेस बनाई।
- 1904 में इंडियन ओपिनियन पत्र संभाला और डरबन के पास फीनिक्स आश्रम बसाया।
- सितंबर 1906 से ट्रांसवाल में भारतीयों के पंजीकरण कानून के विरुद्ध सत्याग्रह शुरू हुआ।
- 1910 में जोहान्सबर्ग के पास टॉल्स्टॉय फार्म की स्थापना हुई।
लगभग इक्कीस वर्ष के इस दौर में उन्होंने सीखा कि शांत रहकर, कष्ट सहकर और कानून तोड़ने का दंड स्वीकार करके भी शक्तिशाली सरकार को झुकाया जा सकता है।
भारत लौटकर किसानों और मजदूरों के आंदोलन
9 जनवरी 1915 को गांधी जी भारत लौटे। इसी तारीख की याद में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। गोपाल कृष्ण गोखले को वे अपना राजनीतिक गुरु मानते थे और उनकी सलाह पर एक वर्ष तक देश भर में घूमकर लोगों की हालत समझी। 25 मई 1915 को अहमदाबाद के कोचरब में सत्याग्रह आश्रम बना, जो 1917 में साबरमती नदी के किनारे चला गया।
| आंदोलन | वर्ष | मुद्दा |
|---|---|---|
| चंपारण, बिहार | 1917 | नील की खेती करने वाले किसानों पर अत्याचार |
| अहमदाबाद मिल हड़ताल | 1918 | मिल मजदूरों का वेतन |
| खेड़ा, गुजरात | 1918 | फसल खराब होने पर लगान माफी |
चंपारण में डॉ राजेंद्र प्रसाद और खेड़ा में वल्लभभाई पटेल जैसे साथी उन्हें यहीं मिले।
स्वतंत्रता संग्राम के तीन बड़े पड़ाव
असहयोग आंदोलन (1920 से 1922)
जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के बाद गांधी जी ने सरकारी स्कूल, अदालत, उपाधियाँ और विदेशी कपड़े छोड़ने का आह्वान किया। फरवरी 1922 में चौरी चौरा की हिंसा के बाद उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया। मार्च 1922 में गिरफ्तार होकर वे यरवदा जेल भेजे गए।
नमक सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा (1930)
12 मार्च 1930 को वे साबरमती आश्रम से 78 साथियों के साथ पैदल निकले और 6 अप्रैल 1930 को दांडी के समुद्र तट पर नमक बनाकर कानून तोड़ा। मार्च 1931 में गांधी इरविन समझौता हुआ और वे दूसरे गोलमेज सम्मेलन में लंदन गए। 1932 में यरवदा जेल में उपवास के बाद पूना समझौता हुआ।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
8 अगस्त 1942 को मुंबई में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ और गांधी जी ने करो या मरो का मंत्र दिया। अगले ही दिन उन्हें पुणे के आगा खाँ महल में नजरबंद कर दिया गया, जहाँ 22 फरवरी 1944 को कस्तूरबा का निधन हुआ।
गांधी जी के विचार: सत्य, अहिंसा, स्वदेशी
गांधी जी के लिए राजनीति और नैतिकता अलग नहीं थीं। सत्याग्रह का अर्थ था सत्य पर डटे रहना और विरोधी से घृणा किए बिना अन्याय का विरोध करना। उनके रचनात्मक कार्यक्रम में ये बातें शामिल थीं:
- खादी और चरखा, ताकि गाँव आत्मनिर्भर बनें
- छुआछूत का अंत और हरिजन सेवा
- हिंदू मुस्लिम एकता
- बुनियादी शिक्षा, जिसमें हाथ के काम से सीखना था
- ग्राम स्वराज और नशाबंदी
1936 में वर्धा के पास सेवाग्राम आश्रम उनके कार्य का नया केंद्र बना।
महात्मा गांधी की रचनाएँ और पत्र-पत्रिकाएँ
| रचना / पत्र | विधा | विशेषता |
|---|---|---|
| हिंद स्वराज (1909) | संवाद शैली की पुस्तिका | लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते समय जहाज पर लिखी, आधुनिक सभ्यता की आलोचना |
| सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा | आत्मकथा | मूल गुजराती में, नवजीवन में 1925 से 1929 तक धारावाहिक छपी |
| दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह का इतिहास | संस्मरण / इतिहास | वहाँ के संघर्ष का विस्तृत वर्णन |
| इंडियन ओपिनियन | साप्ताहिक पत्र | दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों की आवाज |
| यंग इंडिया और नवजीवन | साप्ताहिक पत्र | असहयोग के दिनों में विचारों का प्रचार |
| हरिजन (1933 से) | साप्ताहिक पत्र | छुआछूत विरोध और रचनात्मक कार्य |
उनकी भाषा सरल, सीधी और बातचीत जैसी थी। वे गुजराती, अंग्रेजी और हिंदुस्तानी तीनों में लिखते थे।
वर्ष के अनुसार घटनाएँ (टाइम लाइन)
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1869 | पोरबंदर में जन्म |
| 1888 से 1891 | लंदन में कानून की पढ़ाई |
| 1893 | दक्षिण अफ्रीका पहुँचे |
| 1915 | भारत वापसी, कोचरब आश्रम |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह, साबरमती आश्रम |
| 1920 | असहयोग आंदोलन |
| 1930 | दांडी यात्रा |
| 1931 | गांधी इरविन समझौता, दूसरा गोलमेज सम्मेलन |
| 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन |
| 1947 | स्वतंत्रता के दिन कोलकाता में शांति के लिए उपवास और प्रार्थना |
| 1948 | 30 जनवरी को दिल्ली में हत्या |
गांधी जयंती, शहीद दिवस और उनकी विरासत
30 जनवरी 1948 की शाम बिड़ला भवन की प्रार्थना सभा में जाते समय उन्हें गोली मार दी गई। देश हर साल 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाकर उन्हें श्रद्धांजलि देता है। उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर गांधी जयंती है, और संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में इसे अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। गांधी जयंती पर जीवन परिचय लिखने या भाषण देने वाले छात्र ऊपर की टाइम लाइन से मुख्य बिंदु ले सकते हैं।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं ने अहिंसक संघर्ष की प्रेरणा गांधी जी से ली। 6 जुलाई 1944 के रेडियो भाषण में सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। उन्हें महात्मा की उपाधि देने का श्रेय प्रायः रवींद्रनाथ टैगोर को दिया जाता है।
बोर्ड परीक्षा का नमूना उत्तर: गांधी जी (संक्षेप में)
महात्मा गांधी (1869 से 1948)
महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ। पिता करमचंद गांधी और माता पुतलीबाई थीं। 1883 में कस्तूरबा से विवाह हुआ। लंदन से बैरिस्टर बनकर वे 1893 में दक्षिण अफ्रीका गए और रंगभेद के विरुद्ध सत्याग्रह का प्रयोग किया। 1915 में भारत लौटकर उन्होंने चंपारण और खेड़ा में किसानों का साथ दिया। असहयोग आंदोलन, 1930 की दांडी यात्रा और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उनके नेतृत्व में चले। हिंद स्वराज और सत्य के प्रयोग उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में उनकी हत्या हुई। सत्य और अहिंसा के कारण वे विश्व भर में आदर पाते हैं।
शीर्षकों का सही क्रम याद रखने में लेखन टूल मदद करता है, जिसमें तथ्य भरते ही उत्तर का ढाँचा बन जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गांधी जी का जीवन परिचय दस पंक्तियों में किस क्रम से लिखें?
जन्म (2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर), माता-पिता, विवाह, लंदन की शिक्षा, दक्षिण अफ्रीका, भारत के तीन बड़े आंदोलन, रचनाएँ और मृत्यु (30 जनवरी 1948) इसी क्रम में लिखें। आठ से दस वाक्य काफी हैं। ऊपर का संक्षिप्त उत्तर नमूने के रूप में देखें।
महात्मा गांधी की जीवनी में दांडी यात्रा कब हुई?
दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा गया। यह सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत थी।
गांधी जी ने असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया?
फरवरी 1922 में उत्तर प्रदेश के चौरी चौरा में भीड़ ने थाने में आग लगा दी, जिसमें पुलिसकर्मी मारे गए। गांधी जी अहिंसा को आंदोलन की शर्त मानते थे, इसलिए उन्होंने आंदोलन रोक दिया।
गांधी जी ने अपनी आत्मकथा किस शीर्षक से लिखी?
शीर्षक है सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा। यह मूल रूप से गुजराती में लिखी गई और नवजीवन पत्र में धारावाहिक रूप से छपी। अंग्रेजी में यह The Story of My Experiments with Truth नाम से प्रसिद्ध है।
गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस में क्या संबंध है?
दोनों 2 अक्टूबर को मनाए जाते हैं। भारत में यह गांधी जयंती है और संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में इसी दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया।
गांधी जी के राजनीतिक गुरु कौन थे?
गांधी जी गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। भारत लौटने पर गोखले की सलाह से ही उन्होंने पहले देश भर की यात्रा की।