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Sardar Vallabhbhai Patel ka jivan parichay (सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय)

लौह पुरुषबारडोली 1928अपडेट: 16 Oct 2026

Sardar vallabhbhai patel ka jivan parichay समझने के लिए दो शब्द याद रखिए: किसान और एकता। गुजरात के किसानों का नेतृत्व करते हुए उन्हें सरदार की उपाधि मिली, और स्वतंत्रता के बाद सैकड़ों रियासतों को भारत में मिलाने के कारण वे लौह पुरुष कहलाए। sardar vallabhbhai patel ki jivani या sardar patel ka jivan parichay खोजने वाले छात्रों के लिए यह पेज कक्षा की तैयारी और प्रिंट करके दोहराने लायक बनाया गया है।

नीचे सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी तिथिवार दी गई है, उसके बाद उनके योगदान की तालिका, समय रेखा और परीक्षा में लिखने का छोटा उत्तर दिया गया है। उस युग के दूसरे नेताओं से परिचय के लिए स्वतंत्रता सेनानी विभाग खोलें।

सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय

मुख्य बातें

  • पूरा नाम

    वल्लभभाई झवेरभाई पटेल
  • जन्म

    31 अक्टूबर 1875, नडियाद (गुजरात), पैतृक गाँव करमसद
  • माता-पिता

    लाडबा और झवेरभाई पटेल
  • पत्नी और संतान

    झवेरबा, पुत्री मणिबेन और पुत्र डाह्याभाई
  • शिक्षा

    बैरिस्टर, मिडिल टेम्पल, लंदन (1910 से 1913)
  • उपाधि

    सरदार (बारडोली, 1928), लौह पुरुष
  • प्रमुख कार्य / योगदान

    खेड़ा और बारडोली सत्याग्रह, 562 रियासतों का एकीकरण, पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री
  • सम्मान

    भारत रत्न (1991, मरणोपरांत)
  • मृत्यु

    15 दिसंबर 1950, बंबई (मुंबई)

Sardar vallabhbhai patel ka jivan parichay: बचपन और देर से पूरी हुई पढ़ाई

वल्लभभाई का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नडियाद में ननिहाल में हुआ, जबकि परिवार करमसद गाँव का था। पिता झवेरभाई खेती करते थे और माता लाडबा घर संभालती थीं। जन्म की कोई लिखित तारीख उपलब्ध नहीं है, 31 अक्टूबर को सामान्य रूप से स्वीकार किया जाता है। खेतों में पिता का हाथ बँटाते हुए उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और 1897 में लगभग बाईस वर्ष की आयु में नडियाद के हाई स्कूल से मैट्रिक पास की।

कॉलेज जाने का पैसा नहीं था, इसलिए उन्होंने खुद पढ़कर जिला वकील की परीक्षा दी और पहले गोधरा, फिर 1902 से बोरसद में वकालत की। फौजदारी मुकदमों में उनकी जिरह प्रसिद्ध हो गई। 1909 के आरंभ में पत्नी झवेरबा का निधन हो गया। बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए भी उन्होंने इंग्लैंड जाने का अपना सपना नहीं छोड़ा।

लंदन से अहमदाबाद: वकील से जननेता

1910 में वे लंदन गए और मिडिल टेम्पल में दाखिला लिया। तीन वर्ष का पाठ्यक्रम उन्होंने लगभग दो वर्ष में पूरा किया और 1913 में बैरिस्टर बनकर लौटे। अहमदाबाद में उनकी वकालत जल्दी जम गई। शुरुआत में वे राजनीति से दूर रहते थे और गांधी जी के तरीकों से विशेष प्रभावित नहीं थे, पर चंपारण की सफलता और गांधी जी से निकट परिचय के बाद उनका मन बदल गया।

1917 में वे अहमदाबाद नगरपालिका में स्वच्छता आयुक्त चुने गए और 1924 से 1928 तक नगरपालिका समिति के अध्यक्ष रहे। प्लेग और बाढ़ के समय राहत कार्य, नालियों और सफाई की व्यवस्था में उन्होंने प्रशासनिक कुशलता दिखाई, जो आगे चलकर देश के काम आई।

किसान आंदोलनों का नेतृत्व: खेड़ा से बारडोली तक

पटेल के नेतृत्व वाले प्रमुख आंदोलन
आंदोलनवर्षपरिणाम
खेड़ा सत्याग्रह1918फसल खराब होने पर लगान वसूली में राहत
नागपुर झंडा सत्याग्रह1923राष्ट्रीय झंडा फहराने के अधिकार के लिए संघर्ष
बारडोली सत्याग्रह192822 प्रतिशत लगान वृद्धि घटकर 6.03 प्रतिशत रह गई

बारडोली में उन्होंने गाँव गाँव शिविर बनाए, किसानों को लगान न देने और जब्ती का शांतिपूर्वक सामना करने के लिए तैयार किया। आंदोलन की सफलता के बाद वहाँ की महिलाओं ने उन्हें सरदार कहना शुरू किया। गांधी जी के रचनात्मक कार्यक्रम को गाँवों तक पहुँचाने में यह अनुभव बहुत काम आया।

कांग्रेस अध्यक्षता और जेल यात्राएँ

1931 में कराची अधिवेशन में वे कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इसी अधिवेशन में मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक नीति का प्रस्ताव पारित हुआ, जो आगे संविधान के विचारों का आधार बना।

  • 1930: नमक सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तारी
  • 1932 से 1933: गांधी जी के साथ यरवदा जेल में, फिर नासिक जेल
  • 1940 से 1941: व्यक्तिगत सत्याग्रह में जेल
  • 1942 से लगभग 1945: भारत छोड़ो आंदोलन के बाद अहमदनगर किले में नजरबंदी

जेल में भी वे अनुशासन से रहते, पढ़ते और साथियों का हौसला बढ़ाते थे।

रियासतों का एकीकरण: पटेल का सबसे बड़ा योगदान

15 अगस्त 1947 को वे देश के पहले उप प्रधानमंत्री बने और गृह, रियासत तथा सूचना एवं प्रसारण विभाग संभाले। अंग्रेजों के जाने के बाद 562 देसी रियासतों के सामने भारत या पाकिस्तान में मिलने अथवा अलग रहने का विकल्प था। रियासत विभाग के सचिव वी. पी. मेनन के साथ मिलकर पटेल ने विलय पत्र और समझौतों के जरिए लगभग सभी रियासतों को एक वर्ष से कम समय में भारत में मिला लिया। बाद में इन्हें मिलाकर कहीं कम प्रशासनिक इकाइयाँ बनाई गईं।

कठिन मामले

जूनागढ़: नवाब ने पाकिस्तान में मिलने की घोषणा की, पर जनता के विरोध और बाद में हुए जनमत संग्रह के बाद राज्य भारत में आया। हैदराबाद: निजाम के अलग रहने के प्रयास के बाद 13 सितंबर 1948 को पुलिस कार्रवाई (ऑपरेशन पोलो) शुरू हुई और पाँच दिन में राज्य भारत का अंग बन गया।

प्रशासनिक सेवाएँ और विभाजन के बाद की चुनौतियाँ

विभाजन के बाद शरणार्थियों का पुनर्वास, दंगों पर नियंत्रण और नई सरकार की व्यवस्था गृह मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी थी। वे अखिल भारतीय सेवाओं को बनाए रखने के पक्ष में थे, ताकि पूरे देश में एक जैसा प्रशासनिक ढाँचा रहे। 21 अप्रैल 1947 को दिल्ली के मेटकाफ हाउस में उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया था, इसी की याद में 21 अप्रैल को सिविल सेवा दिवस मनाया जाता है।

15 दिसंबर 1950 को बंबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ।

सम्मान और स्मृति

  • 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न
  • 31 अक्टूबर, यानी उनका जन्मदिन, देश में राष्ट्रीय एकता दिवस कहलाता है
  • गुजरात के केवड़िया में 182 मीटर ऊँची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, जिसका अनावरण 31 अक्टूबर 2018 को हुआ
  • अहमदाबाद के हवाई अड्डे और अनेक संस्थाओं के नाम उन पर रखे गए हैं

पटेल ने कोई साहित्यिक रचना नहीं लिखी, पर उनके भाषण और पत्र बाद में संकलनों के रूप में प्रकाशित हुए।

वर्ष और घटना: पटेल की टाइम लाइन

वर्षघटना
1875नडियाद में जन्म
1897मैट्रिक
1913बैरिस्टर बनकर अहमदाबाद लौटे
1918खेड़ा सत्याग्रह
1928बारडोली सत्याग्रह, सरदार की उपाधि
1931कराची अधिवेशन के अध्यक्ष
1947उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री, रियासतों का विलय
1948हैदराबाद का भारत में विलय
1950बंबई में निधन
1991भारत रत्न

संक्षिप्त उत्तर: परीक्षा की कॉपी के लिए

सरदार वल्लभभाई पटेल (1875 से 1950)

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ। उनके पिता झवेरभाई और माता लाडबा थीं। 1913 में वे लंदन के मिडिल टेम्पल से बैरिस्टर बनकर अहमदाबाद लौटे। गांधी जी के संपर्क में आकर उन्होंने 1918 में खेड़ा और 1928 में बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जहाँ उन्हें सरदार की उपाधि मिली। 1931 में वे कराची कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष बने। स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने 562 रियासतों का भारत में विलय कराया, इसलिए उन्हें लौह पुरुष कहा जाता है। 15 दिसंबर 1950 को बंबई में उनका देहांत हुआ और 1991 में देश ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किया।

दूसरे व्यक्तियों पर इसी तरह का उत्तर तैयार करने के लिए जीवन परिचय लिखने का तरीका पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि कब और कहाँ मिली?

1928 के बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद वहाँ की महिलाओं ने उन्हें सरदार कहा। तभी से यह नाम उनके साथ जुड़ गया।

सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय में रियासतों की संख्या कितनी लिखें?

अधिकतर पाठ्यपुस्तकें 562 रियासतें लिखती हैं। कुछ स्रोतों में संख्या थोड़ी अलग मिलती है, इसलिए लगभग 562 लिखना सुरक्षित है।

पटेल को लौह पुरुष क्यों कहा जाता है?

विभाजन के कठिन समय में दृढ़ निर्णय लेकर उन्होंने रियासतों का विलय कराया और देश की आंतरिक व्यवस्था संभाली। उनकी इसी दृढ़ता के कारण उन्हें लौह पुरुष कहा गया।

राष्ट्रीय एकता दिवस कब मनाया जाता है?

सरदार पटेल के जन्मदिन 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह 2014 से हर वर्ष मनाया जा रहा है।

sardar vallabhbhai patel jivan parichay में उनकी शिक्षा के बारे में क्या लिखें?

उन्होंने 1897 में नडियाद से मैट्रिक की, स्वयं पढ़कर जिला वकील की परीक्षा दी और 1910 से 1913 के बीच लंदन के मिडिल टेम्पल से बैरिस्टरी पूरी की।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहाँ है?

यह गुजरात के नर्मदा जिले में केवड़िया के पास सरदार सरोवर बाँध के निकट है। 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा सरदार पटेल को समर्पित है।