Jivan parichay यानी किसी व्यक्ति के जीवन की क्रमबद्ध, तथ्यपूर्ण झलक, और यह साइट इसी के लिए बनी है। यहाँ हिंदी के कवियों, गद्य लेखकों, संतों, स्वतंत्रता सेनानियों और वैज्ञानिकों का जीवन परिचय सरल भाषा में मिलता है, जिसमें जन्म, परिवार, शिक्षा, प्रमुख कार्य, रचनाएँ और निधन तक की बातें सही क्रम में रखी गई हैं।
बोर्ड परीक्षा में लेखक या कवि का परिचय लगभग हर साल पूछा जाता है, इसलिए हर पेज के अंत में छोटा, याद करने लायक उत्तर भी दिया गया है। अगर आप biography in hindi खोजते हुए आए हैं, तो नीचे की तालिकाओं से सीधे अपने व्यक्ति तक पहुँचिए।
मुख्य बातें
साइट का विषय
हिंदी में जीवन परिचय और जीवनीमुख्य वर्ग
कवि और लेखक, संत और भक्त कवि, स्वतंत्रता सेनानी, वैज्ञानिक और महापुरुषहर पेज पर
जन्म, मृत्यु, रचनाएँ, भाषा-शैली, समय रेखा, प्रश्नोत्तरकिसके लिए
नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षार्थी और सामान्य पाठकउपयोगी गाइड
हब पेज
Jivan parichay क्या होता है
किसी व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक की मुख्य घटनाओं, उसके काम और समाज पर उसके प्रभाव को संक्षेप में बताने वाला लेख जीवन परिचय कहलाता है। इसमें कल्पना की जगह नहीं होती, केवल प्रमाणित तथ्य होते हैं: कब और कहाँ जन्म हुआ, माता-पिता कौन थे, पढ़ाई कहाँ हुई, जीवन में कौन से मोड़ आए और व्यक्ति ने क्या रचा या क्या किया।
जीवनी (jivani) इसी का विस्तृत रूप है। जीवनी एक पूरी पुस्तक हो सकती है, जबकि जीवन परिचय कुछ अनुच्छेदों में सिमट जाता है। साहित्य के विद्यार्थी के लिए जीवन परिचय के दो हिस्से होते हैं: पहला, व्यक्ति का जीवन वृत्त, और दूसरा, साहित्यिक परिचय, जिसमें कृतियाँ, लिखने का ढंग और साहित्य में उनकी जगह आती है। क्रांतिकारी, विज्ञानी या सुधारक के परिचय में दूसरे हिस्से की जगह उनका योगदान और विरासत लिखी जाती है।
- उद्देश्य: व्यक्ति को उसके समय और परिवेश के साथ समझना।
- गुण: सच्चाई, क्रम, संक्षिप्तता और सम्मानजनक भाषा।
- उपयोग: परीक्षा, भाषण, प्रोजेक्ट कार्य और सामान्य ज्ञान।
इस साइट के पेज कैसे बने हैं
हर व्यक्ति के पेज की बनावट लगभग एक जैसी रखी गई है ताकि पढ़ते समय आपको हर बार नया ढाँचा न खोजना पड़े। सबसे ऊपर मुख्य तथ्यों का छोटा बॉक्स है, फिर विस्तार से जीवन की घटनाएँ आती हैं। लेखकों के पेज पर साहित्यिक परिचय, प्रमुख रचनाओं की तालिका, शैली की ख़ूबियाँ और हिंदी में उनका दर्जा मिलता है। सेनानियों और वैज्ञानिकों के पेज पर उनकी भूमिका, मुख्य घटनाएँ और देन लिखी गई है।
जहाँ जन्म वर्ष या जन्म स्थान को लेकर विद्वानों में मतभेद है, वहाँ पाठ्यपुस्तकों में मान्य तिथि पहले दी गई है और दूसरा मत भी साथ में बताया गया है। प्राचीन और मध्यकालीन कवियों के लिए विक्रम संवत् और ईस्वी दोनों लिखे गए हैं। हर पेज के आख़िर में परीक्षा के हिसाब से छोटा उत्तर और विद्यार्थियों के आम प्रश्नों के उत्तर हैं। पूरा पेज प्रिंट करके दोहराने लायक है।
कवि और लेखक: ka jivan parichay पढ़ने के लिए सूची
नीचे आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख नाम हैं, जिनके परिचय बोर्ड परीक्षाओं में बार-बार आते हैं। किसी भी नाम पर टैप करके उस व्यक्ति का पूरा पेज खोलिए। काल के हिसाब से छाँटी गई अलग सूची कवि परिचय वाले पेज पर है।
| नाम | युग / क्षेत्र | किस बात के लिए याद किए जाते हैं |
|---|---|---|
| भारतेन्दु हरिश्चन्द्र | भारतेन्दु युग | आधुनिक हिंदी गद्य और नाटक के जनक माने जाते हैं |
| अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' | द्विवेदी युग | खड़ी बोली के पहले सफल महाकाव्य के रचयिता |
| मैथिलीशरण गुप्त | द्विवेदी युग | राष्ट्रकवि की उपाधि, भारतीय संस्कृति पर काव्य |
| आचार्य रामचन्द्र शुक्ल | आलोचना और इतिहास | हिंदी साहित्य का पहला व्यवस्थित इतिहास |
| मुंशी प्रेमचंद | कथा साहित्य | उपन्यास सम्राट, गाँव और किसान की कहानियाँ |
| जयशंकर प्रसाद | छायावाद | कामायनी और ऐतिहासिक नाटक |
| सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | छायावाद | मुक्त छंद के प्रवर्तक, विद्रोही स्वर |
| सुमित्रानंदन पंत | छायावाद | प्रकृति के सुकुमार कवि |
| महादेवी वर्मा | छायावाद | आधुनिक मीरा कही जाने वाली कवयित्री और संस्मरण लेखिका |
| सुभद्राकुमारी चौहान | राष्ट्रीय काव्यधारा | झाँसी की रानी कविता की रचयिता |
| रामधारी सिंह 'दिनकर' | राष्ट्रीय काव्यधारा | ओज और वीर रस के राष्ट्रकवि |
| हरिवंशराय बच्चन | हालावाद | मधुशाला और चार खंडों की आत्मकथा |
| हजारीप्रसाद द्विवेदी | निबंध और उपन्यास | ललित निबंध और सांस्कृतिक उपन्यास |
| वासुदेवशरण अग्रवाल | निबंध और पुरातत्व | भारतीय संस्कृति पर शोधपूर्ण निबंध |
| नागार्जुन | प्रगतिवाद | जनकवि, हिंदी और मैथिली दोनों में लेखन |
| हरिशंकर परसाई | व्यंग्य | व्यंग्य को गद्य की प्रतिष्ठित विधा का दर्जा दिलाया |
| मन्नू भंडारी | नई कहानी | आपका बंटी और महाभोज जैसे उपन्यास |
| रवीन्द्रनाथ टैगोर | बांग्ला साहित्य | गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले कवि |
| कालिदास | संस्कृत साहित्य | अभिज्ञानशाकुन्तलम् और मेघदूत के महाकवि |
संत और भक्त कवियों का जीवन परिचय
भक्तिकाल को हिंदी कविता का सुनहरा दौर माना जाता है। इस दौर के कवियों के जन्म वर्ष अक्सर अनुमान पर आधारित हैं, इसलिए उनके पेजों पर दोनों मत दिए गए हैं। संगीत सम्राट तानसेन भी इसी युग के हैं और उनके ध्रुपद पद ब्रजभाषा में मिलते हैं, इसलिए उन्हें भी यहाँ रखा गया है।
| नाम | धारा / परंपरा | प्रसिद्ध कृति या पहचान |
|---|---|---|
| कबीरदास | निर्गुण, ज्ञानाश्रयी शाखा | बीजक, साखी, सबद, रमैनी |
| संत रैदास (रविदास) | निर्गुण संत परंपरा | गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित पद |
| सूरदास | सगुण, कृष्णभक्ति शाखा | सूरसागर, वात्सल्य रस के पद |
| गोस्वामी तुलसीदास | सगुण, रामभक्ति शाखा | रामचरितमानस, विनयपत्रिका |
| मीराबाई | कृष्णभक्ति | गिरधर गोपाल को समर्पित पद |
| रसखान | कृष्णभक्ति | सुजान रसखान, प्रेमवाटिका |
| अब्दुर्रहीम खानखाना 'रहीम' | नीति काव्य | नीति के दोहे, अकबर के नवरत्नों में एक |
| तानसेन | ध्रुपद संगीत | अकबर के दरबार के संगीत सम्राट |
स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन परिचय
भारत की आज़ादी की लड़ाई 1857 से 1947 तक लगभग नब्बे वर्ष चली। इसमें अहिंसक सत्याग्रह भी था और सशस्त्र क्रांति भी। नीचे की सूची में ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनके बारे में विद्यार्थी सबसे अधिक पढ़ते हैं। अधिक नामों और उनकी भूमिका के लिए स्वतंत्रता सेनानियों का हब पेज देखिए।
| नाम | जीवनकाल (ईस्वी) | मुख्य भूमिका |
|---|---|---|
| रानी लक्ष्मीबाई | 1828 से 1858 | 1857 के संग्राम में झाँसी की रक्षा |
| बिरसा मुंडा | 1875 से 1900 | उलगुलान, जनजातीय अधिकारों का आंदोलन |
| महात्मा गांधी | 1869 से 1948 | सत्याग्रह और अहिंसा से जन आंदोलन |
| सरदार वल्लभभाई पटेल | 1875 से 1950 | बारडोली सत्याग्रह, रियासतों का एकीकरण |
| डॉ. राजेन्द्र प्रसाद | 1884 से 1963 | चंपारण से जुड़ाव, भारत के पहले राष्ट्रपति |
| सुभाषचंद्र बोस | 1897 से 1945 (मृत्यु पर विवाद) | आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व |
| चंद्रशेखर आज़ाद | 1906 से 1931 | क्रांतिकारी संगठन के प्रमुख सेनापति |
| भगत सिंह | 1907 से 1931 | युवा क्रांतिकारी, केंद्रीय असेंबली में बम |
वैज्ञानिक, समाज सुधारक और अन्य महापुरुष
गणित, खगोल, अंतरिक्ष विज्ञान, अध्यात्म और समाज सुधार के क्षेत्र में भारत ने कई ऐसे व्यक्ति दिए जिनका जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है। इनके पेजों में साहित्यिक परिचय की जगह शोध, खोज, सुधार कार्य और सम्मान विस्तार से दिए गए हैं।
| नाम | क्षेत्र | मुख्य योगदान |
|---|---|---|
| आर्यभट | गणित और खगोल | आर्यभटीय ग्रंथ, पृथ्वी के घूर्णन का विचार |
| श्रीनिवास रामानुजन | गणित | संख्या सिद्धांत और अनंत श्रेणियों पर काम |
| डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम | अंतरिक्ष और रक्षा विज्ञान | मिसाइल कार्यक्रम, बाद में राष्ट्रपति |
| स्वामी विवेकानंद | अध्यात्म और समाज | शिकागो धर्म सभा का भाषण, रामकृष्ण मिशन |
| डॉ. भीमराव आंबेडकर | संविधान और समाज सुधार | संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष |
| गौतम बुद्ध | धर्म और दर्शन | मध्यम मार्ग और अष्टांगिक मार्ग |
| महाराणा प्रताप | मेवाड़ का इतिहास | हल्दीघाटी का युद्ध, स्वाभिमान के प्रतीक |
हिंदी साहित्य का काल विभाजन: एक नज़र में
किसी कवि का परिचय लिखने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह किस काल का है, क्योंकि काल से ही उसकी भाषा, विषय और शैली समझ में आती है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के इतिहास ग्रंथ में चार कालों वाला विभाजन मिलता है, और अधिकांश पाठ्यपुस्तकें यही विभाजन मानती हैं।
| काल | समय (विक्रम संवत्) | मुख्य प्रवृत्ति | प्रमुख नाम |
|---|---|---|---|
| आदिकाल (वीरगाथा काल) | 1050 से 1375 | वीर रस, रासो ग्रंथ, राजाओं की प्रशस्ति | चंदबरदाई, जगनिक, विद्यापति, अमीर खुसरो |
| भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल) | 1375 से 1700 | निर्गुण और सगुण भक्ति | कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई, रसखान, रहीम |
| रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल) | 1700 से 1900 | श्रृंगार, अलंकार और लक्षण ग्रंथ | केशवदास, बिहारी, भूषण, घनानंद, देव, पद्माकर |
| आधुनिक काल (गद्यकाल) | 1900 के बाद | गद्य का विकास, राष्ट्रीय चेतना, नए वाद | भारतेन्दु, हरिऔध, गुप्त, प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी, दिनकर |
आदिकाल
इस काल में राजाओं के आश्रय में रहने वाले चारण कवियों ने युद्ध और वीरता के वर्णन किए। चंदबरदाई का पृथ्वीराज रासो इसका प्रसिद्ध ग्रंथ है। विद्यापति ने मैथिली में श्रृंगार और भक्ति के पद लिखे, और अमीर खुसरो ने खड़ी बोली में पहेलियाँ और मुकरियाँ रचीं।
भक्तिकाल
भक्ति की दो धाराएँ चलीं। निर्गुण धारा में कबीर और रैदास जैसे ज्ञानमार्गी संत तथा जायसी जैसे प्रेममार्गी सूफ़ी कवि आते हैं। सगुण धारा में तुलसीदास ने राम की और सूरदास, मीराबाई तथा रसखान ने कृष्ण की भक्ति की। नीति के दोहों के लिए रहीम इसी समय प्रसिद्ध हुए।
रीतिकाल
इस समय काव्यशास्त्र के नियमों पर आधारित लक्षण ग्रंथ लिखे गए और श्रृंगार रस प्रमुख रहा। बिहारी की सतसई, केशवदास की रामचंद्रिका और घनानंद के प्रेम कवित्त प्रसिद्ध हैं। भूषण ने इसी युग में शिवाजी और छत्रसाल की वीरता पर ओजस्वी काव्य लिखा।
आधुनिक काल
भारतेन्दु युग से खड़ी बोली गद्य का तेज़ विकास हुआ। उसके बाद द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद और नई कविता आए। उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, आलोचना, संस्मरण और आत्मकथा जैसी गद्य विधाएँ इसी काल में परिपक्व हुईं।
जीवन परिचय पढ़ने और याद रखने का आसान तरीका
- पहले व्यक्ति का काल और क्षेत्र तय कीजिए, जैसे भक्तिकाल का कवि या क्रांतिकारी सेनानी।
- जन्म, मृत्यु, जन्म स्थान और माता-पिता के नाम एक छोटी पर्ची पर लिखिए।
- प्रमुख रचनाएँ या कार्य कम से कम चार याद कीजिए, उनकी विधा के साथ।
- भाषा-शैली के दो या तीन गुण याद रखिए, जैसे ब्रजभाषा, अवधी, खड़ी बोली, ओजपूर्ण या व्यंग्यात्मक।
- पेज के अंत वाला संक्षिप्त उत्तर बिना देखे एक बार लिखकर मिलाइए।
उत्तर किन शीर्षकों में बँटे, कितने अंक पर कितना लिखें, और एक नमूना उत्तर जीवन परिचय कैसे लिखें नाम की गाइड में मिलेगा। वहाँ एक लेखन टूल भी है जो आपके भरे गए तथ्यों को परीक्षा के क्रम में सजा देता है। जीवनी, आत्मकथा, संस्मरण और रेखाचित्र में क्या फ़र्क है, यह जीवनी और आत्मकथा वाले लेख में समझाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जीवन परिचय और जीवनी में क्या अंतर है?
जीवन परिचय आकार में छोटा रहता है और मुख्य तथ्यों तक सीमित रहता है। जीवनी किसी दूसरे लेखक द्वारा लिखा गया विस्तृत ग्रंथ होता है, जिसमें व्यक्ति के जीवन की घटनाएँ, विचार और संघर्ष गहराई से आते हैं।
परीक्षा में किन कवियों का जीवन परिचय सबसे अधिक पूछा जाता है?
हाई स्कूल और इंटर में तुलसीदास, सूरदास, कबीर, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, निराला, मैथिलीशरण गुप्त और दिनकर अक्सर आते हैं। गद्य में प्रेमचंद, रामचन्द्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी और वासुदेवशरण अग्रवाल प्रमुख हैं।
जन्म वर्ष में मतभेद हो तो उत्तर में कौन सा वर्ष लिखें?
पाठ्यपुस्तक में जो वर्ष दिया है वही लिखिए और साथ में एक पंक्ति जोड़िए कि इस बारे में विद्वान एकमत नहीं हैं। इससे परीक्षक समझ जाते हैं कि आपको दोनों मतों की जानकारी है।
क्या इस साइट के पेज प्रिंट करके पढ़े जा सकते हैं?
हाँ, हर पेज सादा और प्रिंट योग्य रखा गया है। तालिकाएँ और संक्षिप्त उत्तर कागज़ पर भी साफ़ दिखते हैं, इसलिए परीक्षा से पहले दोहराने में आसानी रहती है।
हिंदी साहित्य के कितने काल माने जाते हैं?
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार चार काल हैं: आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल। भक्तिकाल को स्वर्ण युग और आधुनिक काल को गद्यकाल भी कहा जाता है।
स्वतंत्रता सेनानी का परिचय लिखते समय क्या शामिल करें?
जन्म, परिवार और शिक्षा के बाद आंदोलन में प्रवेश, प्रमुख घटनाएँ, जेल यात्राएँ या संघर्ष, और देश के लिए उनका योगदान लिखिए। अंत में यह बताइए कि देश उन्हें किस बात के लिए याद करता है।













































