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Kavi parichay: हिंदी के कवियों और लेखकों की सूची

भक्तिकालछायावादअपडेट: 16 Oct 2026

Kavi parichay का यह पेज हिंदी के उन रचनाकारों की सूची है जिनके बारे में हाई स्कूल, इंटर और प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे ज़्यादा प्रश्न आते हैं। हर नाम के साथ उसका काल, धारा, मुख्य रचनाएँ और जीवनकाल दिया गया है, और पूरा परिचय पढ़ने के लिए अलग पेज का लिंक है।

कवि परिचय और लेखक परिचय (lekhak parichay) दोनों के लिए यहाँ से शुरुआत कीजिए। पद्य के कवि और गद्य के लेखक अलग अलग तालिकाओं में रखे गए हैं ताकि काल के हिसाब से दोहराना आसान रहे।

कवि परिचय: काल, रचनाएँ और पेज

मुख्य बातें

  • कवि और लेखक

    35 से अधिक रचनाकारों के अलग पेज
  • काल

    भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल
  • हर पेज में

    जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएँ, भाषा-शैली, साहित्य में स्थान
  • सबसे पुराने

    कालिदास (संस्कृत) और कबीरदास (हिंदी)
  • उत्तर लिखने की विधि

भक्तिकाल के कवि: kavi parichay तालिका

भक्तिकाल के अधिकतर कवियों का जन्म वर्ष निश्चित नहीं है। यहाँ वही वर्ष लिखे गए हैं जो पाठ्यपुस्तकों में मिलते हैं, और व्यक्ति के पेज पर दूसरा मत भी दिया गया है। इन कवियों की भाषा मुख्यतः अवधी, ब्रजभाषा या सधुक्कड़ी है।

भक्तिकाल और मध्यकाल के कवि
कविकाल / धाराप्रमुख रचनाजीवनकालपेज
कबीरदासभक्तिकाल, निर्गुण ज्ञानमार्गीबीजक (साखी, सबद, रमैनी)सन् 1398 से 1518 (मतभेद)पूरा परिचय
रैदासभक्तिकाल, निर्गुण संतफुटकर पद और साखियाँपंद्रहवीं शताब्दी (मतभेद)पूरा परिचय
सूरदासभक्तिकाल, कृष्ण काव्यसूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरीसन् 1478 से 1583 (मतभेद)पूरा परिचय
तुलसीदासभक्तिकाल, राम काव्यरामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली, गीतावलीसंवत् 1589 से 1680 (सन् 1532 से 1623)पूरा परिचय
मीराबाईभक्तिकाल, कृष्ण प्रेमपदावलीलगभग सन् 1498 से 1547पूरा परिचय
रसखानभक्तिकाल, कृष्ण काव्यसुजान रसखान, प्रेमवाटिकासोलहवीं से सत्रहवीं शताब्दीपूरा परिचय
रहीमभक्तिकाल, नीति काव्यदोहावली, बरवै नायिका भेद, मदनाष्टकसन् 1556 से 1627पूरा परिचय
तानसेनभक्तिकाल के समकालीन संगीतकारसंगीत सार, श्री गणेश स्तोत्र, ध्रुपद पदलगभग 1500 से 1589पूरा परिचय

याद रखने की एक सीधी तरकीब है: राम के कवि तुलसी अवधी में, कृष्ण के कवि सूर और रसखान ब्रजभाषा में, और निर्गुण के संत कबीर मिली-जुली सधुक्कड़ी भाषा में लिखते थे। मीरा की भाषा में राजस्थानी और ब्रज का मेल है।

रीतिकाल के कवि और महाकवि भूषण

रीतिकाल में अधिकांश कवि राजदरबारों में रहे और श्रृंगार रस के लक्षण ग्रंथ लिखे। बिहारी (बिहारी सतसई), केशवदास (रामचंद्रिका, कविप्रिया), घनानंद (सुजान हित), देव, मतिराम और पद्माकर इस काल के मुख्य नाम हैं। इसी भीड़ में एक कवि ऐसा था जिसने श्रृंगार छोड़कर वीर रस को चुना।

mahakavi bhushan ka jivan parichay (संक्षेप में)

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और मिश्रबंधुओं के अनुसार भूषण का जन्म संवत् 1670 (सन् 1613 के आसपास) में कानपुर ज़िले के टिकवाँपुर गाँव में यमुना के किनारे हुआ। पिता का नाम रत्नाकर त्रिपाठी था। रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि चिंतामणि और मतिराम उनके भाई माने जाते हैं। चित्रकूट के राजा रुद्र सोलंकी ने उन्हें 'कविभूषण' की उपाधि दी, तभी से वे भूषण नाम से प्रसिद्ध हुए। उनके मुख्य आश्रयदाता छत्रपति शिवाजी और बुंदेलखंड के छत्रसाल थे। संवत् 1772 (लगभग सन् 1715) में उनका निधन हुआ। जन्म वर्ष के बारे में विद्वानों में मतभेद है, ग्रियर्सन ने 1603 के आसपास का समय माना है।

उनकी तीन रचनाएँ उपलब्ध हैं: शिवराज भूषण, शिवा बावनी और छत्रसाल दशक। भाषा ओजपूर्ण ब्रजभाषा है जिसमें अरबी, फ़ारसी और बुंदेली के शब्द भी मिलते हैं। कवित्त और सवैया उनके प्रिय छंद हैं।

आधुनिक काल के कवि और गद्य लेखक

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से आधुनिक हिंदी की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद खड़ी बोली कविता की भाषा बनी, छायावाद ने उसे कोमलता दी और प्रगतिवाद ने उसे आम आदमी से जोड़ा। गद्य में उपन्यास, कहानी, निबंध, आलोचना और व्यंग्य जैसी विधाएँ फलीं। नीचे की तालिका लगभग जन्म क्रम में है।

आधुनिक काल के कवि और लेखक
रचनाकारयुग / वादप्रमुख रचनाएँविधापेज
भारतेन्दु हरिश्चन्द्रभारतेन्दु युगअंधेर नगरी, भारत दुर्दशा, सत्य हरिश्चन्द्रनाटक, कवितापूरा परिचय
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'द्विवेदी युगप्रियप्रवास, वैदेही वनवास, चोखे चौपदेमहाकाव्य, मुक्तकपूरा परिचय
मैथिलीशरण गुप्तद्विवेदी युगभारत-भारती, साकेत, यशोधराप्रबंध काव्यपूरा परिचय
रामचन्द्र शुक्लशुक्ल युगहिंदी साहित्य का इतिहास, चिंतामणिइतिहास, आलोचना, निबंधपूरा परिचय
प्रेमचंदप्रेमचंद युगगोदान, गबन, कर्मभूमि, मानसरोवरउपन्यास, कहानीपूरा परिचय
जयशंकर प्रसादछायावादकामायनी, आँसू, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्तमहाकाव्य, नाटकपूरा परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'छायावादपरिमल, अनामिका, राम की शक्तिपूजाकवितापूरा परिचय
सुमित्रानंदन पंतछायावादपल्लव, गुंजन, चिदंबराकवितापूरा परिचय
महादेवी वर्माछायावादनीहार, रश्मि, नीरजा, यामा, दीपशिखागीत, संस्मरणपूरा परिचय
सुभद्राकुमारी चौहानराष्ट्रीय धारामुकुल, त्रिधारा, बिखरे मोतीकविता, कहानीपूरा परिचय
रामधारी सिंह 'दिनकर'राष्ट्रीय धारारश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वशीप्रबंध काव्य, गद्यपूरा परिचय
हरिवंशराय बच्चनहालावादमधुशाला, मधुबाला, मधुकलशगीत, आत्मकथापूरा परिचय
हजारीप्रसाद द्विवेदीशुक्लोत्तर युगबाणभट्ट की आत्मकथा, अशोक के फूल, कुटजउपन्यास, ललित निबंधपूरा परिचय
वासुदेवशरण अग्रवालशुक्लोत्तर युगपृथिवीपुत्र, कल्पवृक्षसांस्कृतिक निबंधपूरा परिचय
नागार्जुनप्रगतिवादबलचनमा, रतिनाथ की चाची, युगधाराउपन्यास, कवितापूरा परिचय
हरिशंकर परसाईस्वातंत्र्योत्तरविकलांग श्रद्धा का दौर, सदाचार का तावीज़व्यंग्यपूरा परिचय
मन्नू भंडारीनई कहानी आंदोलनयही सच है, आपका बंटी, महाभोजउपन्यास, कहानीपूरा परिचय

संस्कृत और बांग्ला के कवि

हिंदी की पाठ्यपुस्तकों में कुछ ऐसे कवि भी आते हैं जिन्होंने हिंदी में नहीं लिखा, पर जिनका प्रभाव पूरे भारतीय साहित्य पर है। संस्कृत के महाकवि कालिदास और बांग्ला के कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर इसके उदाहरण हैं। टैगोर को गीतांजलि के अंग्रेज़ी रूप के लिए सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

हिंदी पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने वाले अन्य भाषाओं के कवि
कविभाषाप्रमुख रचनापेज
कालिदाससंस्कृतअभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूतम्, रघुवंशम्पूरा परिचय
रवीन्द्रनाथ टैगोरबांग्लागीतांजलि, गोरापूरा परिचय

लेखक परिचय और कवि परिचय में क्या अलग होता है

दोनों का ढाँचा एक है, पर ज़ोर अलग जगह पड़ता है। कवि के परिचय में काव्य की भाषा, रस, छंद, अलंकार और भाव पक्ष पर बात होती है। गद्य लेखक के परिचय में विधा, शैली के प्रकार (विचारात्मक, वर्णनात्मक, व्यंग्यात्मक, भावात्मक) और भाषा की शुद्धता पर ध्यान दिया जाता है।

  • कवि: भाव पक्ष, कला पक्ष, रस, छंद, अलंकार, काव्य भाषा।
  • गद्य लेखक: विधाएँ, शैली के भेद, शब्द भंडार, वाक्य रचना, मुहावरे।
  • दोनों में समान: जन्म, शिक्षा, जीवन की घटनाएँ, प्रमुख रचनाएँ, साहित्य में स्थान।

उत्तर लिखने का क्रम और अंकों के अनुसार शब्द सीमा इस गाइड में विस्तार से दी गई है।

किस कवि को किस उपाधि से जाना जाता है

परीक्षा में अक्सर उपाधि देकर कवि का नाम पूछा जाता है। नीचे कुछ प्रचलित उपाधियाँ हैं।

कवियों की प्रचलित उपाधियाँ
उपाधिरचनाकार
उपन्यास सम्राटप्रेमचंद
राष्ट्रकविमैथिलीशरण गुप्त, दिनकर
आधुनिक मीरामहादेवी वर्मा
महाप्राणनिराला
प्रकृति का सुकुमार कविपंत
वात्सल्य सम्राटसूरदास
खड़ी बोली के पहले महाकाव्यकारहरिऔध
जनकविनागार्जुन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

kavi parichay in hindi में सबसे पहले क्या लिखें?

सबसे पहले कवि का पूरा नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान और माता-पिता का नाम लिखिए। उसके बाद शिक्षा, जीवन की प्रमुख घटनाएँ और निधन, फिर साहित्यिक परिचय आता है।

भूषण किस काल के कवि हैं और उनकी प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं?

भूषण रीतिकाल के कवि हैं, पर उन्होंने श्रृंगार की जगह वीर रस में लिखा। शिवराज भूषण, शिवा बावनी और छत्रसाल दशक उनकी तीन उपलब्ध रचनाएँ हैं।

छायावाद के चार प्रमुख कवि कौन हैं?

प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी, इन चारों को मिलाकर छायावाद के चार स्तंभ कहा जाता है।

खड़ी बोली का पहला महाकाव्य किसे माना जाता है?

अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध का प्रियप्रवास इस श्रेय का अधिकारी है, जिसे खड़ी बोली में रचे गए महाकाव्यों में सबसे पहला सफल प्रयास कहा जाता है। इसमें मथुरा चले गए कृष्ण के वियोग में डूबे ब्रज का चित्रण है।

गद्य लेखकों में कौन से नाम परीक्षा के लिए ज़रूरी हैं?

प्रेमचंद, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, वासुदेवशरण अग्रवाल, हरिशंकर परसाई और मन्नू भंडारी के परिचय अक्सर पूछे जाते हैं।

क्या संत कबीर को कवि परिचय में लिख सकते हैं?

हाँ, कबीर भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं। उनकी वाणी का संग्रह बीजक कहलाता है, जिसमें साखी, सबद और रमैनी हैं।