Kavi parichay का यह पेज हिंदी के उन रचनाकारों की सूची है जिनके बारे में हाई स्कूल, इंटर और प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे ज़्यादा प्रश्न आते हैं। हर नाम के साथ उसका काल, धारा, मुख्य रचनाएँ और जीवनकाल दिया गया है, और पूरा परिचय पढ़ने के लिए अलग पेज का लिंक है।
कवि परिचय और लेखक परिचय (lekhak parichay) दोनों के लिए यहाँ से शुरुआत कीजिए। पद्य के कवि और गद्य के लेखक अलग अलग तालिकाओं में रखे गए हैं ताकि काल के हिसाब से दोहराना आसान रहे।

मुख्य बातें
कवि और लेखक
35 से अधिक रचनाकारों के अलग पेजकाल
भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक कालहर पेज में
जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएँ, भाषा-शैली, साहित्य में स्थानसबसे पुराने
उत्तर लिखने की विधि
भक्तिकाल के कवि: kavi parichay तालिका
भक्तिकाल के अधिकतर कवियों का जन्म वर्ष निश्चित नहीं है। यहाँ वही वर्ष लिखे गए हैं जो पाठ्यपुस्तकों में मिलते हैं, और व्यक्ति के पेज पर दूसरा मत भी दिया गया है। इन कवियों की भाषा मुख्यतः अवधी, ब्रजभाषा या सधुक्कड़ी है।
| कवि | काल / धारा | प्रमुख रचना | जीवनकाल | पेज |
|---|---|---|---|---|
| कबीरदास | भक्तिकाल, निर्गुण ज्ञानमार्गी | बीजक (साखी, सबद, रमैनी) | सन् 1398 से 1518 (मतभेद) | पूरा परिचय |
| रैदास | भक्तिकाल, निर्गुण संत | फुटकर पद और साखियाँ | पंद्रहवीं शताब्दी (मतभेद) | पूरा परिचय |
| सूरदास | भक्तिकाल, कृष्ण काव्य | सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी | सन् 1478 से 1583 (मतभेद) | पूरा परिचय |
| तुलसीदास | भक्तिकाल, राम काव्य | रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली, गीतावली | संवत् 1589 से 1680 (सन् 1532 से 1623) | पूरा परिचय |
| मीराबाई | भक्तिकाल, कृष्ण प्रेम | पदावली | लगभग सन् 1498 से 1547 | पूरा परिचय |
| रसखान | भक्तिकाल, कृष्ण काव्य | सुजान रसखान, प्रेमवाटिका | सोलहवीं से सत्रहवीं शताब्दी | पूरा परिचय |
| रहीम | भक्तिकाल, नीति काव्य | दोहावली, बरवै नायिका भेद, मदनाष्टक | सन् 1556 से 1627 | पूरा परिचय |
| तानसेन | भक्तिकाल के समकालीन संगीतकार | संगीत सार, श्री गणेश स्तोत्र, ध्रुपद पद | लगभग 1500 से 1589 | पूरा परिचय |
याद रखने की एक सीधी तरकीब है: राम के कवि तुलसी अवधी में, कृष्ण के कवि सूर और रसखान ब्रजभाषा में, और निर्गुण के संत कबीर मिली-जुली सधुक्कड़ी भाषा में लिखते थे। मीरा की भाषा में राजस्थानी और ब्रज का मेल है।
रीतिकाल के कवि और महाकवि भूषण
रीतिकाल में अधिकांश कवि राजदरबारों में रहे और श्रृंगार रस के लक्षण ग्रंथ लिखे। बिहारी (बिहारी सतसई), केशवदास (रामचंद्रिका, कविप्रिया), घनानंद (सुजान हित), देव, मतिराम और पद्माकर इस काल के मुख्य नाम हैं। इसी भीड़ में एक कवि ऐसा था जिसने श्रृंगार छोड़कर वीर रस को चुना।
mahakavi bhushan ka jivan parichay (संक्षेप में)
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और मिश्रबंधुओं के अनुसार भूषण का जन्म संवत् 1670 (सन् 1613 के आसपास) में कानपुर ज़िले के टिकवाँपुर गाँव में यमुना के किनारे हुआ। पिता का नाम रत्नाकर त्रिपाठी था। रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि चिंतामणि और मतिराम उनके भाई माने जाते हैं। चित्रकूट के राजा रुद्र सोलंकी ने उन्हें 'कविभूषण' की उपाधि दी, तभी से वे भूषण नाम से प्रसिद्ध हुए। उनके मुख्य आश्रयदाता छत्रपति शिवाजी और बुंदेलखंड के छत्रसाल थे। संवत् 1772 (लगभग सन् 1715) में उनका निधन हुआ। जन्म वर्ष के बारे में विद्वानों में मतभेद है, ग्रियर्सन ने 1603 के आसपास का समय माना है।
उनकी तीन रचनाएँ उपलब्ध हैं: शिवराज भूषण, शिवा बावनी और छत्रसाल दशक। भाषा ओजपूर्ण ब्रजभाषा है जिसमें अरबी, फ़ारसी और बुंदेली के शब्द भी मिलते हैं। कवित्त और सवैया उनके प्रिय छंद हैं।
आधुनिक काल के कवि और गद्य लेखक
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से आधुनिक हिंदी की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद खड़ी बोली कविता की भाषा बनी, छायावाद ने उसे कोमलता दी और प्रगतिवाद ने उसे आम आदमी से जोड़ा। गद्य में उपन्यास, कहानी, निबंध, आलोचना और व्यंग्य जैसी विधाएँ फलीं। नीचे की तालिका लगभग जन्म क्रम में है।
| रचनाकार | युग / वाद | प्रमुख रचनाएँ | विधा | पेज |
|---|---|---|---|---|
| भारतेन्दु हरिश्चन्द्र | भारतेन्दु युग | अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा, सत्य हरिश्चन्द्र | नाटक, कविता | पूरा परिचय |
| अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' | द्विवेदी युग | प्रियप्रवास, वैदेही वनवास, चोखे चौपदे | महाकाव्य, मुक्तक | पूरा परिचय |
| मैथिलीशरण गुप्त | द्विवेदी युग | भारत-भारती, साकेत, यशोधरा | प्रबंध काव्य | पूरा परिचय |
| रामचन्द्र शुक्ल | शुक्ल युग | हिंदी साहित्य का इतिहास, चिंतामणि | इतिहास, आलोचना, निबंध | पूरा परिचय |
| प्रेमचंद | प्रेमचंद युग | गोदान, गबन, कर्मभूमि, मानसरोवर | उपन्यास, कहानी | पूरा परिचय |
| जयशंकर प्रसाद | छायावाद | कामायनी, आँसू, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त | महाकाव्य, नाटक | पूरा परिचय |
| सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | छायावाद | परिमल, अनामिका, राम की शक्तिपूजा | कविता | पूरा परिचय |
| सुमित्रानंदन पंत | छायावाद | पल्लव, गुंजन, चिदंबरा | कविता | पूरा परिचय |
| महादेवी वर्मा | छायावाद | नीहार, रश्मि, नीरजा, यामा, दीपशिखा | गीत, संस्मरण | पूरा परिचय |
| सुभद्राकुमारी चौहान | राष्ट्रीय धारा | मुकुल, त्रिधारा, बिखरे मोती | कविता, कहानी | पूरा परिचय |
| रामधारी सिंह 'दिनकर' | राष्ट्रीय धारा | रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वशी | प्रबंध काव्य, गद्य | पूरा परिचय |
| हरिवंशराय बच्चन | हालावाद | मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश | गीत, आत्मकथा | पूरा परिचय |
| हजारीप्रसाद द्विवेदी | शुक्लोत्तर युग | बाणभट्ट की आत्मकथा, अशोक के फूल, कुटज | उपन्यास, ललित निबंध | पूरा परिचय |
| वासुदेवशरण अग्रवाल | शुक्लोत्तर युग | पृथिवीपुत्र, कल्पवृक्ष | सांस्कृतिक निबंध | पूरा परिचय |
| नागार्जुन | प्रगतिवाद | बलचनमा, रतिनाथ की चाची, युगधारा | उपन्यास, कविता | पूरा परिचय |
| हरिशंकर परसाई | स्वातंत्र्योत्तर | विकलांग श्रद्धा का दौर, सदाचार का तावीज़ | व्यंग्य | पूरा परिचय |
| मन्नू भंडारी | नई कहानी आंदोलन | यही सच है, आपका बंटी, महाभोज | उपन्यास, कहानी | पूरा परिचय |
संस्कृत और बांग्ला के कवि
हिंदी की पाठ्यपुस्तकों में कुछ ऐसे कवि भी आते हैं जिन्होंने हिंदी में नहीं लिखा, पर जिनका प्रभाव पूरे भारतीय साहित्य पर है। संस्कृत के महाकवि कालिदास और बांग्ला के कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर इसके उदाहरण हैं। टैगोर को गीतांजलि के अंग्रेज़ी रूप के लिए सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
| कवि | भाषा | प्रमुख रचना | पेज |
|---|---|---|---|
| कालिदास | संस्कृत | अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूतम्, रघुवंशम् | पूरा परिचय |
| रवीन्द्रनाथ टैगोर | बांग्ला | गीतांजलि, गोरा | पूरा परिचय |
लेखक परिचय और कवि परिचय में क्या अलग होता है
दोनों का ढाँचा एक है, पर ज़ोर अलग जगह पड़ता है। कवि के परिचय में काव्य की भाषा, रस, छंद, अलंकार और भाव पक्ष पर बात होती है। गद्य लेखक के परिचय में विधा, शैली के प्रकार (विचारात्मक, वर्णनात्मक, व्यंग्यात्मक, भावात्मक) और भाषा की शुद्धता पर ध्यान दिया जाता है।
- कवि: भाव पक्ष, कला पक्ष, रस, छंद, अलंकार, काव्य भाषा।
- गद्य लेखक: विधाएँ, शैली के भेद, शब्द भंडार, वाक्य रचना, मुहावरे।
- दोनों में समान: जन्म, शिक्षा, जीवन की घटनाएँ, प्रमुख रचनाएँ, साहित्य में स्थान।
उत्तर लिखने का क्रम और अंकों के अनुसार शब्द सीमा इस गाइड में विस्तार से दी गई है।
किस कवि को किस उपाधि से जाना जाता है
परीक्षा में अक्सर उपाधि देकर कवि का नाम पूछा जाता है। नीचे कुछ प्रचलित उपाधियाँ हैं।
| उपाधि | रचनाकार |
|---|---|
| उपन्यास सम्राट | प्रेमचंद |
| राष्ट्रकवि | मैथिलीशरण गुप्त, दिनकर |
| आधुनिक मीरा | महादेवी वर्मा |
| महाप्राण | निराला |
| प्रकृति का सुकुमार कवि | पंत |
| वात्सल्य सम्राट | सूरदास |
| खड़ी बोली के पहले महाकाव्यकार | हरिऔध |
| जनकवि | नागार्जुन |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
kavi parichay in hindi में सबसे पहले क्या लिखें?
सबसे पहले कवि का पूरा नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान और माता-पिता का नाम लिखिए। उसके बाद शिक्षा, जीवन की प्रमुख घटनाएँ और निधन, फिर साहित्यिक परिचय आता है।
भूषण किस काल के कवि हैं और उनकी प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं?
भूषण रीतिकाल के कवि हैं, पर उन्होंने श्रृंगार की जगह वीर रस में लिखा। शिवराज भूषण, शिवा बावनी और छत्रसाल दशक उनकी तीन उपलब्ध रचनाएँ हैं।
छायावाद के चार प्रमुख कवि कौन हैं?
प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी, इन चारों को मिलाकर छायावाद के चार स्तंभ कहा जाता है।
खड़ी बोली का पहला महाकाव्य किसे माना जाता है?
अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध का प्रियप्रवास इस श्रेय का अधिकारी है, जिसे खड़ी बोली में रचे गए महाकाव्यों में सबसे पहला सफल प्रयास कहा जाता है। इसमें मथुरा चले गए कृष्ण के वियोग में डूबे ब्रज का चित्रण है।
गद्य लेखकों में कौन से नाम परीक्षा के लिए ज़रूरी हैं?
प्रेमचंद, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, वासुदेवशरण अग्रवाल, हरिशंकर परसाई और मन्नू भंडारी के परिचय अक्सर पूछे जाते हैं।
क्या संत कबीर को कवि परिचय में लिख सकते हैं?
हाँ, कबीर भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं। उनकी वाणी का संग्रह बीजक कहलाता है, जिसमें साखी, सबद और रमैनी हैं।