apj abdul kalam ka jivan parichay एक ऐसे विद्यार्थी की कहानी है जो सुबह अखबार बाँटकर पढ़ाई का खर्च जुटाता था और आगे चलकर देश के रॉकेट और मिसाइल कार्यक्रमों का नेतृत्व करते हुए भारत का राष्ट्रपति बना। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था, इसलिए लोग a p j abdul kalam ka jivan parichay या केवल अब्दुल कलाम का जीवन परिचय भी खोजते हैं।
इस पृष्ठ पर डॉ अब्दुल कलाम का जीवन परिचय विज्ञान को सरल भाषा में समझाते हुए दिया गया है: रॉकेट क्या करता है, SLV-3 क्यों खास था, मिसाइल कार्यक्रम में उनकी भूमिका क्या थी। जो विद्यार्थी apj abdul kalam ki jivani या biography of apj abdul kalam in hindi ढूँढते हैं, उनके लिए भी यही क्रम रखा गया है। यह apj abdul kalam biography in hindi पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए कक्षा के प्रोजेक्ट और परीक्षा दोनों में उपयोगी है।

मुख्य बातें
पूरा नाम
अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलामजन्म
15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडुमाता-पिता
आशियम्मा और जैनुलाब्दीन (नाव के मालिक)शिक्षा
सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातक; मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से वैमानिकी इंजीनियरिंगप्रमुख कार्य
SLV-3 के परियोजना निदेशक (रोहिणी उपग्रह, जुलाई 1980), समन्वित निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के प्रमुख, पोखरण द्वितीय (1998) में भूमिकापद
भारत के 11वें राष्ट्रपति (25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007)सम्मान
पद्म भूषण (1981), पद्म विभूषण (1990), भारत रत्न (1997)प्रसिद्ध पुस्तकें
विंग्स ऑफ फायर, इंडिया 2020, इग्नाइटेड माइंड्समृत्यु
27 जुलाई 2015, शिलांग, मेघालय
dr apj abdul kalam ka jivan parichay: रामेश्वरम का बचपन
कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के तीर्थ नगर रामेश्वरम में हुआ। पिता जैनुलाब्दीन नावों के मालिक थे और मस्जिद में इमाम भी थे, माता आशियम्मा घर संभालती थीं। परिवार बड़ा था और साधन सीमित थे। बालक कलाम सुबह जल्दी उठकर अखबार बाँटते थे ताकि स्कूल का खर्च निकल सके।
समुद्र के किनारे उड़ते पक्षियों को देखकर उनके मन में उड़ान के प्रति जिज्ञासा जागी। उनके एक अध्यापक ने पक्षियों के उड़ने का तरीका समझाया, और यहीं से उन्होंने तय किया कि आगे उड़ान से जुड़ा विषय पढ़ेंगे। उनकी आत्मकथा में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं।
शिक्षा: भौतिकी से वैमानिकी तक
स्कूली पढ़ाई रामनाथपुरम के श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिकी में स्नातक किया। फिर वे मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गए और वैमानिकी इंजीनियरिंग पढ़ी, यानी हवाई जहाज और उड़ने वाले यंत्रों का विज्ञान। फीस के लिए उनकी बहन ने अपने गहने गिरवी रखे थे, यह बात भी उनकी आत्मकथा में आती है।
वे भारतीय वायुसेना में पायलट बनना चाहते थे, पर चयन में थोड़े अंक से चूक गए। इस असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि वे रक्षा अनुसंधान की ओर मुड़ गए।
रक्षा अनुसंधान से अंतरिक्ष अनुसंधान तक
पढ़ाई के बाद कलाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान में वैज्ञानिक बने और वहाँ होवरक्राफ्ट के एक प्रोटोटाइप पर काम किया। सन् 1969 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में आए।
SLV-3 को आसान भाषा में समझें
उपग्रह को धरती की कक्षा में पहुँचाने के लिए बहुत तेज रफ्तार चाहिए, जो रॉकेट देता है। SLV-3 यानी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, भारत में ही बना पहला उपग्रह प्रक्षेपण यान था और कलाम इसके परियोजना निदेशक थे। जुलाई 1980 में इसने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी के पास की कक्षा में स्थापित किया। इसके साथ भारत उन गिने चुने देशों में शामिल हो गया जो अपने रॉकेट से उपग्रह भेज सकते हैं। आगे के PSLV कार्यक्रम की नींव में भी उनका योगदान माना जाता है।
मिसाइल मैन कैसे बने
लगभग दो दशक ISRO में बिताने के बाद कलाम फिर DRDO लौटे और समन्वित निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के मुख्य कार्यकारी बने। मिसाइल एक ऐसा रॉकेट है जो अपने लक्ष्य की ओर दिशा बदलते हुए जा सकता है। इस कार्यक्रम में अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी मिसाइलों पर काम हुआ। देश में ही ऐसी तकनीक बनाने के कारण लोग उन्हें मिसाइल मैन कहने लगे।
सन् 1998 में पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों में वे वैज्ञानिक दल के प्रमुख लोगों में थे और परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर इस काम का समन्वय किया।
जनता के राष्ट्रपति (2002 से 2007)
25 जुलाई 2002 को कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति बने और 25 जुलाई 2007 तक पूरा कार्यकाल निभाया। राष्ट्रपति भवन के दरवाजे उन्होंने विद्यार्थियों के लिए खुले रखे और देश भर के स्कूलों, कॉलेजों में जाकर बच्चों से बात की। सादगी और बच्चों से लगाव के कारण वे जनता के राष्ट्रपति कहलाए। उन्होंने गाँवों में शहरी सुविधाएँ पहुँचाने की योजना पुरा (PURA) और विकसित भारत के लिए विज़न 2020 जैसी सोच भी सामने रखी। देश के पहले राष्ट्रपति के बारे में डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय देखें।
प्रमुख पुस्तकें
| पुस्तक | विधा | विशेषता |
|---|---|---|
| विंग्स ऑफ फायर (1999) | आत्मकथा | अरुण तिवारी के साथ लिखी, बचपन से वैज्ञानिक जीवन तक की कहानी |
| इंडिया 2020 (1998) | विचार और योजना | वाई एस राजन के साथ, विकसित भारत का खाका |
| इग्नाइटेड माइंड्स (2002) | प्रेरक लेखन | युवाओं में आत्मविश्वास जगाने पर |
| माई जर्नी | संस्मरण | जीवन के अनुभवों की छोटी कथाएँ |
आत्मकथा और जीवनी का अंतर समझने के लिए जीवनी और आत्मकथा पृष्ठ पढ़ें।
सम्मान और अंतिम दिन
उन्हें 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिला। देश विदेश के अड़तालीस से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट दी। 27 जुलाई 2015 को शिलांग के भारतीय प्रबंध संस्थान में विद्यार्थियों को व्याख्यान देते समय वे गिर पड़े और हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। जीवन के अंतिम क्षण तक वे वही कर रहे थे जो उन्हें सबसे प्रिय था: युवाओं से बात करना।
जीवन की समय रेखा
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1931 | रामेश्वरम में जन्म |
| 1969 | ISRO में प्रवेश |
| 1980 | SLV-3 से रोहिणी उपग्रह का प्रक्षेपण |
| 1997 | भारत रत्न |
| 1998 | पोखरण परमाणु परीक्षण |
| 2002 | 11वें राष्ट्रपति बने |
| 2015 | शिलांग में निधन |
अब्दुल कलाम का जीवन परिचय 10 पंक्तियों में
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में हुआ।
उनके पिता जैनुलाब्दीन और माता आशियम्मा थीं।
उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिकी और MIT मद्रास से वैमानिकी इंजीनियरिंग पढ़ी।
DRDO के बाद 1969 में वे ISRO से जुड़े।
उनके निर्देशन में SLV-3 ने 1980 में रोहिणी उपग्रह को कक्षा में पहुँचाया।
मिसाइल कार्यक्रम का नेतृत्व करने से वे मिसाइल मैन कहलाए।
1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों में उनकी प्रमुख भूमिका रही।
2002 से 2007 तक वे भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे।
उन्हें 1997 में भारत रत्न मिला और उन्होंने विंग्स ऑफ फायर जैसी पुस्तकें लिखीं।
27 जुलाई 2015 को शिलांग में व्याख्यान देते समय उनका निधन हुआ।
यह उत्तर छापने लायक और परीक्षा के लिए तैयार है। ढाँचा समझने के लिए जीवन परिचय कैसे लिखें और अन्य नामों के लिए मुख्य पृष्ठ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम क्या है?
उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम है। एपीजे इन्हीं पहले तीन शब्दों के आरंभिक अक्षर हैं।
अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन क्यों कहते हैं?
उन्होंने DRDO में समन्वित निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जिसमें अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें विकसित हुईं। स्वदेशी मिसाइल तकनीक में इस योगदान के कारण उन्हें मिसाइल मैन कहा गया।
अब्दुल कलाम राष्ट्रपति कब बने?
वे 25 जुलाई 2002 को भारत के 11वें राष्ट्रपति बने और 25 जुलाई 2007 तक इस पद पर रहे।
अब्दुल कलाम को भारत रत्न कब मिला?
उन्हें सन् 1997 में भारत रत्न मिला। इससे पहले 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण मिल चुका था।
विंग्स ऑफ फायर किसकी रचना है?
विंग्स ऑफ फायर डॉ कलाम की आत्मकथा है, जिसे उन्होंने अरुण तिवारी के साथ लिखा और 1999 में प्रकाशित हुई।
अब्दुल कलाम की मृत्यु कैसे हुई?
27 जुलाई 2015 को शिलांग के भारतीय प्रबंध संस्थान में व्याख्यान देते समय वे गिर पड़े। अस्पताल ले जाने पर हृदय गति रुकने से उनके निधन की पुष्टि हुई।