Jivani aur aatmkatha mein antar समझने का सबसे आसान सूत्र यह है कि जीवनी किसी और के जीवन की कहानी है, जबकि आत्मकथा लेखक अपने ही जीवन के बारे में लिखता है। दोनों गद्य की विधाएँ हैं, दोनों सच्ची घटनाओं पर टिकी हैं, पर लिखने वाले की जगह बदलते ही दृष्टि, भाषा और स्रोत सब बदल जाते हैं।
इस पेज में दोनों की परिभाषा, अंतर की तालिका, संस्मरण और रेखाचित्र से तुलना, और हिंदी की जानी मानी कृतियों के उदाहरण दिए गए हैं। परीक्षा में यह प्रश्न दो से चार अंकों का आता है, इसलिए अंत में छोटा उत्तर भी दिया है।

मुख्य बातें
जीवनी
किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन का प्रामाणिक वर्णनआत्मकथा
लेखक द्वारा अपने ही जीवन का वर्णनसंस्मरण
किसी व्यक्ति या घटना से जुड़ी यादों का लेखरेखाचित्र
शब्दों से खींचा गया किसी व्यक्ति का सजीव चित्रअंग्रेज़ी नाम
Biography, Autobiography, Memoir, Sketchहिंदी की पहली आत्मकथा
अर्धकथानक (बनारसीदास जैन)
जीवनी किसे कहते हैं (jivani kya hai)
जब कोई लेखक किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को खोजबीन करके, क्रम से और साहित्यिक ढंग से प्रस्तुत करता है, तो उस रचना को जीवनी कहते हैं। अंग्रेज़ी में इसे बायोग्राफ़ी कहते हैं, यानी biography meaning in hindi होगा जीवनी या जीवन चरित। jivani kise kahate hain, इसका उत्तर एक वाक्य में: दूसरे के जीवन की सच्ची, शोधपूर्ण कथा।
जीवनीकार को इतिहासकार और कथाकार दोनों का काम करना पड़ता है। उसे पत्र, डायरियाँ, सरकारी काग़ज़, परिवार और मित्रों की बातें जुटानी होती हैं, फिर उन्हें इस तरह लिखना होता है कि पाठक की रुचि बनी रहे। अच्छी जीवनी नायक की प्रशंसा भर नहीं करती, उसकी कमियाँ और संघर्ष भी दिखाती है।
- नायक वास्तविक व्यक्ति होता है।
- तथ्य प्रमाणित होने चाहिए, कल्पना की जगह बहुत कम है।
- लेखक अन्य पुरुष में लिखता है: उन्होंने, वे, उनका।
आत्मकथा क्या है
आत्मकथा वह रचना है जिसमें लेखक स्वयं अपने जीवन की घटनाएँ, अनुभव, सफलताएँ और भूलें पाठक के सामने रखता है। इसमें मैं शैली होती है और लेखक अपने मन की बात सीधे कहता है। इसलिए आत्मकथा में आत्मीयता अधिक होती है, पर निष्पक्ष रहना कठिन होता है, क्योंकि हर व्यक्ति अपने बारे में कुछ बातें बताने से हिचकता है।
सच्ची आत्मकथा का सबसे बड़ा गुण ईमानदारी है। गांधीजी की आत्मकथा इसीलिए सराही जाती है कि उसमें उन्होंने अपनी कमज़ोरियाँ भी खुलकर स्वीकार कीं। हिंदी में बनारसीदास जैन का अर्धकथानक पहली आत्मकथा माना जाता है, जो सत्रहवीं सदी में ब्रजभाषा पद्य में लिखा गया।
jivani aur aatmkatha mein antar: तालिका
नीचे की तालिका में सात आधारों पर दोनों का अंतर दिखाया गया है। परीक्षा में चार या पाँच बिंदु लिख देना पर्याप्त है।
| आधार | जीवनी | आत्मकथा |
|---|---|---|
| लेखक कौन | कोई दूसरा व्यक्ति | व्यक्ति स्वयं |
| पुरुष (व्याकरण) | अन्य पुरुष: वे, उन्होंने | उत्तम पुरुष: मैं, मैंने |
| स्रोत | पत्र, डायरी, साक्षात्कार, दस्तावेज़, समकालीनों की बातें | लेखक की अपनी स्मृति और अनुभव |
| दृष्टि | बाहर से देखी गई, अपेक्षाकृत तटस्थ | भीतर से देखी गई, आत्मीय और निजी |
| समय सीमा | जन्म से मृत्यु तक पूरा जीवन संभव | लिखने के समय तक का जीवन |
| कठिनाई | तथ्य जुटाना और जाँचना | अपनी कमज़ोरियाँ ईमानदारी से मानना |
| उदाहरण | कलम का सिपाही, आवारा मसीहा | अर्धकथानक, क्या भूलूँ क्या याद करूँ |
कई विद्यार्थी इसी प्रश्न को aatmkatha aur jivani mein antar, atmkatha aur jivani mein antar या aatmkatha aur jivani mein kya antar hai लिखकर खोजते हैं। प्रश्न का क्रम बदलने से उत्तर नहीं बदलता, बस तालिका में पहले आत्मकथा वाला स्तंभ लिख दीजिए।
संस्मरण और रेखाचित्र
संस्मरण में लेखक किसी व्यक्ति, स्थान या घटना से जुड़ी अपनी यादें लिखता है। इसमें लेखक स्वयं भी मौजूद रहता है, क्योंकि वह बताता है कि उस व्यक्ति से उसका संबंध कैसा रहा। संस्मरण पूरा जीवन नहीं बताता, केवल कुछ यादगार प्रसंग चुनता है।
रेखाचित्र चित्रकला के स्केच जैसा है। जैसे चित्रकार कुछ रेखाओं से चेहरा उभार देता है, वैसे ही लेखक कुछ वाक्यों में किसी व्यक्ति का रूप, स्वभाव और बोलचाल जीवंत कर देता है। रामवृक्ष बेनीपुरी की माटी की मूरतें हिंदी के प्रसिद्ध रेखाचित्रों का संग्रह है।
महादेवी वर्मा की पथ के साथी, अतीत के चलचित्र तथा स्मृति की रेखाएँ जैसी पुस्तकों में संस्मरण और रेखाचित्र दोनों के गुण मिलते हैं, इसलिए इन्हें संस्मरणात्मक रेखाचित्र भी कहा जाता है। पथ के साथी में उन्होंने अपने समकालीन साहित्यकारों को याद किया है।
| विधा | विषय | आकार | मुख्य गुण |
|---|---|---|---|
| जीवनी | किसी दूसरे का पूरा जीवन | प्रायः पूरी पुस्तक | प्रमाण और क्रमबद्धता |
| आत्मकथा | लेखक का अपना जीवन | प्रायः पूरी पुस्तक, कई खंड भी | आत्मस्वीकृति और ईमानदारी |
| संस्मरण | किसी व्यक्ति या घटना की यादें | छोटा लेख या लेखों का संग्रह | लेखक की निकटता और भावुकता |
| रेखाचित्र | किसी व्यक्ति का शब्दचित्र | छोटा लेख | कम शब्दों में सजीव चित्र |
हिंदी की प्रसिद्ध जीवनियाँ और आत्मकथाएँ
उदाहरण याद रहें तो अंतर का उत्तर मज़बूत बनता है। नीचे दोनों विधाओं की कुछ जानी पहचानी कृतियाँ हैं।
| कृति | लेखक | किसके जीवन पर |
|---|---|---|
| कलम का सिपाही | अमृत राय | प्रेमचंद (अमृत राय उनके पुत्र थे) |
| प्रेमचंद घर में | शिवरानी देवी | प्रेमचंद, पत्नी की दृष्टि से |
| आवारा मसीहा | विष्णु प्रभाकर | बांग्ला उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय |
| निराला की साहित्य साधना | रामविलास शर्मा | निराला का जीवन और साहित्य |
| कृति | लेखक | विशेष बात |
|---|---|---|
| अर्धकथानक | बनारसीदास जैन | सत्रहवीं सदी की ब्रजभाषा पद्य रचना, हिंदी की पहली आत्मकथा मानी जाती है |
| सत्य के प्रयोग | महात्मा गांधी | मूल गुजराती में लिखी गई, हिंदी अनुवाद बहुत पढ़ा जाता है |
| आत्मकथा | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद | बिहार के गाँव से स्वतंत्रता आंदोलन तक का वृत्तांत |
| मेरी जीवन यात्रा | राहुल सांकृत्यायन | घुमक्कड़ लेखक की कई खंडों में फैली आत्मकथा |
| क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक | हरिवंशराय बच्चन | चार खंडों की आत्मकथा, हिंदी की सबसे चर्चित आत्मकथाओं में |
| एक कहानी यह भी | मन्नू भंडारी | लेखिका के जीवन और रचना प्रक्रिया पर |
ध्यान दें: हजारीप्रसाद द्विवेदी की बाणभट्ट की आत्मकथा नाम में आत्मकथा होते हुए भी एक उपन्यास है, जिसमें संस्कृत कवि बाणभट्ट के मुख से कथा कहलवाई गई है। परीक्षा में इसे आत्मकथा के उदाहरण के रूप में न लिखें।
जीवनी, आत्मकथा और जीवन परिचय का संबंध
बोर्ड परीक्षा में जो लेखक परिचय लिखा जाता है, वह न जीवनी है न आत्मकथा। वह जीवनी का छोटा, तथ्यात्मक सार है जिसमें जन्म, शिक्षा, रचनाएँ और साहित्य में स्थान आता है। जीवनी पढ़कर जीवन परिचय लिखना आसान हो जाता है, क्योंकि घटनाओं का क्रम और संदर्भ दोनों पता चलते हैं।
इस साइट पर हर व्यक्ति का परिचय इसी शैली में है, जैसे तुलसीदास, प्रेमचंद और अब्दुल कलाम। जवाब का ढाँचा समझने के लिए लेखन गाइड देखिए।
परीक्षा के लिए छोटा उत्तर
प्रश्न: जीवनी और आत्मकथा में दो अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) जीवनी किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखी जाती है, जबकि आत्मकथा व्यक्ति स्वयं लिखता है। (2) जीवनी अन्य पुरुष शैली में होती है और प्रमाणों पर आधारित होती है, जबकि आत्मकथा उत्तम पुरुष यानी मैं शैली में होती है और लेखक की स्मृति पर टिकी होती है। उदाहरण: कलम का सिपाही (जीवनी), क्या भूलूँ क्या याद करूँ (आत्मकथा)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जीवनी और आत्मकथा में मुख्य अंतर क्या है?
मुख्य अंतर लेखक का है। जीवनी कोई दूसरा लिखता है और आत्मकथा व्यक्ति ख़ुद लिखता है। इसी से शैली, स्रोत और दृष्टि का अंतर पैदा होता है।
हिंदी की पहली आत्मकथा कौन सी है?
बनारसीदास जैन की अर्धकथानक को हिंदी की पहली आत्मकथा माना जाता है। यह सत्रहवीं सदी में ब्रजभाषा पद्य में लिखी गई थी।
प्रेमचंद की जीवनी किसने लिखी?
प्रेमचंद के पुत्र अमृत राय ने कलम का सिपाही नाम से उनकी विस्तृत जीवनी लिखी। उनकी पत्नी शिवरानी देवी ने प्रेमचंद घर में नाम से घरेलू जीवन की यादें लिखीं।
संस्मरण और रेखाचित्र में क्या अंतर है?
संस्मरण में लेखक की अपनी यादें और उस व्यक्ति से संबंध प्रमुख रहता है। रेखाचित्र में लेखक पीछे रहता है और व्यक्ति का रूप, स्वभाव और चरित्र शब्दों से उभारा जाता है।
आवारा मसीहा किसकी जीवनी है?
आवारा मसीहा विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखी बांग्ला उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है। इसे हिंदी की श्रेष्ठ जीवनियों में गिना जाता है।
क्या आत्मकथा में कल्पना हो सकती है?
आत्मकथा सच्ची घटनाओं पर आधारित होती है, इसलिए उसमें कल्पना की जगह नहीं होनी चाहिए। स्मृति के कारण कुछ ब्योरे धुँधले हो सकते हैं, पर लेखक जानबूझकर घटनाएँ नहीं गढ़ता।
जीवनी आत्मकथा में अंतर के लिए कितने बिंदु लिखें?
दो अंकों के प्रश्न में दो साफ़ बिंदु और एक एक उदाहरण पर्याप्त है। चार अंकों के प्रश्न में चार बिंदु तालिका बनाकर लिखिए और दोनों विधाओं की परिभाषा भी जोड़िए।